Monday, February 4, 2013

Zindgi ~ Ek Safar




एक शरारत से सुरु होकर,
हकीक़त पर आ धमकती है जिंदगी ...

कभी सुरूर चढ़ता है इश्क का इस पर ,
कभी छम्म से आ गिरती है जिंदगी ....

भागती हे ये बहोत तेज़,
फिर भी वक़्त से अक्सर पीछे रह जाती है जिंदगी ...

कभी कशिश, कभी मस्ती,
कभी आवारगी है जिंदगी ...

कभी मोबाइल की तूटी हुई स्क्रीन,
तो कभी बियर की खाली बोतल है जिंदगी ...

कभी पापा की डांट ,
तो कभी माँ की मीठी मुस्कान है जिंदगी ...

आज है यहाँ,
तो कल न जाने कहा ले जाती है जिंदगी ...

कभी मीठी शक्कर की तरह,
तोह कभी कडवी नीम सी,
कभी आम तो कभी ख़ास है जिंदगी ...

हर रंग दिखाती है ,
कभी हँसाती तो कभी रुलाती है जिंदगी ...

जी जाओ इसे जिंदादिली से ,
करो मोह्हबत सभी से,
भुला दो सारे गिले शिकवे ,
लगो गले तुम सभी से ,

क्योंकि ...
कहते है काफी जन्मो के बाद मिल पाती है
जिंदगी ... 

2 comments:

  1. काफी उम्दा लिखा है रचित भाई । एक दो लाइन मेरी तरफ से ऐड कर लो - "खुली किताब की तरह है ये ज़िन्दगी, कभी अचार सी खट्टी तो कभी शहद सी मीठी है ज़िन्दगी "
    इसी विषय पे मैंने भी एक कविता लिखी थी चाहो तो देख लो - http://akshayparabrahm.blogspot.in/2010/11/blog-post_8830.html

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    1. ठाकुर साहब, आप से प्रेरणा ले कर लिखने की गुस्ताखी की हे बस .... धन्यवाद् की आपने इसको सराहा।

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